एक ऐसा महोत्सव जहां एक मंच पर शाहाबाद प्रक्षेत्र के संस्कृति, सभ्यता और विरासत की हुई चर्चा

एक ऐसा महोत्सव जहां एक मंच पर शाहाबाद प्रक्षेत्र के संस्कृति, सभ्यता और विरासत की चर्चा हुई. इस महोत्सव में सभी राजनीतिक दल के लोगों ने एक साथ बैठकर अपने पुराने शाहाबाद यानी रोहतास, भोजपुर, बक्सर तथा कैमूर जिले के संस्कृति, सभ्यता, विरासत व गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए ऐतिहासिक व परंपरागत कला-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिए. साथ ही शाहाबाद की विरासत और यहां की संस्कृति के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई. इस महोत्सव का नाम है शाहाबाद महोत्सव. जो 22 दिसम्बर को शाहाबाद के केंद्र बिंदु बिक्रमगंज के इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित किया गया था.

शाहाबाद महोत्सव के दौरान महान विभूति गणितज्ञ बशिष्ठ नारायण सिंह, बाबू वीर कुंवर सिंह, गीता घाट के बाबा, रामानंद तिवारी, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि गौतम, जगजीवन राम, अब्दुल कयूम अंसारी, राम सुभग सिंह, डॉ. दुखन राम, शेरशाह सूरी, राजा राधिका रमण प्रसाद, शिवपूजन सहाय, रामेश्वर सिंह कश्यप उर्फ लोहा सिंह, कैलाशपति मिश्र आदि कई महान विभूतियों की तैल चित्र प्रदर्शनी के रूप में लगाई गई थी. साथ ही शाहाबाद से जुड़े तरह-तरह के व्यंजन एवं सांस्कृतिक विरासत के स्टॉल लगाए गए थे.

शाहबाद महोत्सव में लगे महान विभूतियों की तैल चित्र प्रदर्शनी

स्टॉल में सबसे पहले जमुहार स्थित नारायण मेडिकल व कॉलेज की तरफ से मुफ्त चिकित्सा व्यवस्था की गई थी. जिसमें 29 सदस्य हिस्सा लिए. 14 चिकित्सक वाली मेडिकल कॉलेज की टीम के द्वारा 1000 से अधिक लोगों का मुफ्त में जांच किया गया.

शाहबाद महोत्सव में लगा मेडिकल कैम्प

उसके बाद यशस्वी महिला उद्योग बिक्रमगंज की तरफ से तरह-तरह के हाथ के बनाए हुए व्यंजन, कृष्ण मोहन गुप्ता चेनारी द्वारा मशहूर गुड़ का लड्डू स्टॉल के रूप में लगाए गए थे. नि:शुल्क इको प्रेशर स्वास्थ्य शिविर एवं ओंकार मोटर्स के द्वारा सहित कई तरह के व्यंजन के स्टॉल भी लगाए गए थे.

शाहाबाद महोत्सव में व्यंजन का स्टॉल

आयोजन काफी भव्य था, दर्जनों तोरणद्वार व होर्डिंग से शहर पटा हुआ था. महोत्सव में उपस्थित लोग काफी उत्साहित दिखे. नृत्य, संगीत व भोजपुरी माटी से जुड़ी संस्कृति को भी लोगों ने याद किया. कार्यक्रम शाम तक चलता रहा और देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा.

शाहाबाद महोत्सव में लोगों का हुजूम

अपने गंवई अंदाज में बैठकर जब छोटू बिहारी ने शाहाबाद के माटी खाती लुटावे सीमा पर अपना जान सहित कई देवी गीत एवं पचरा की प्रस्तुति की. इनके अलावा भोजपुरी गायक सर्वजीत सिंह एवं गायिका साक्षी ने देशभक्ति एवं देवी गीतों का प्रस्तुति की.

सबसे मनमोहक गोड़ का पौराणिक एवं पारंपरिक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति कलाकारों ने की इन लोगों के अलावे कैमूर पहाड़ी पर रहने वाली जनजाति जो चकाचौंध रोशनी उसे भी दूर है उनके द्वारा भी अपने भाषा में नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुति की गई. जो उपस्थित लोगों को समझ के परे लग रहा था. इसी दौरान कल्याण पदाधिकारी के रूप में उपस्थित जनजाति के अधिकारी को सम्मानित किया गया.

जनजाति द्वारा मानर के थाप पर नृत्य

शाहाबाद महोत्सव में रालोसपा के सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा, राजद नेत्री कांति सिंह, डुमरांव राजघराने के युवराज चंद्र विजय सिंह, औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह, बक्सर विधायक मुन्ना तिवारी, नोखा के पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया, गोपाल नारायण विश्वविद्यालय के सचिव गोविंद नारायण सिंह, शाहाबाद महोत्सव के संयोजक अखिलेश कुमार, बिहार पुलिस एसोसिएशन अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह, अमरेंद्र मिश्रा, रोहतास जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष प्रमिला सिंह, संझौली उपप्रमुख मधु उपाध्याय सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद थे. महोत्सव में सासाराम के संत पॉल स्कूल की छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत की. कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी पटना के कार्यक्रम अधिशासी व शायर शंकर कैमूरी ने किये.

शाहाबाद महोत्सव में आयें रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने शाहाबाद की भाषा भोजपुरी का बखान करते हुए कहा कि इस भाषा का कोई मोल नहीं है. कहा कि शाहाबाद में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन अब तक इस क्षेत्र की उपेक्षा होती रही है. उन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक व पौराणिक धरोहरों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि शाहाबाद में रोहतास गढ़किला, कई जगह झरने एवं देव स्थल, शेरशाह का मकबरा भी है. जो देश के मानचित्र पर आज भी अंकित है.

शाहाबाद महोत्सव में लौंडा नाच

महोत्सव में औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि शाहाबाद की धरती ऋषि-मुनियों तपोस्थली व वीर सपूतों की ऐतिहासिक धरती रही है. यहां विश्वामित्र जैसे महान ऋषि, शेरशाह जैसे महान शासक, वीर कुंवर सिंह, निशान सिंह जैसे 1857 की आजादी की लड़ाई के महान योद्धा हुए. यहां के रोहतासगढ़ व शेरगढ़ का किला, मंडेश्वरी, ताराचंडी, यक्षिणी भवानी धाम समेत अनेक ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरे हैं, जिन पर हम गर्व कर सकते हैं. इन धरोहरों को अक्षुण्ण रखने की हमें जरूरत है.

भोजपुरी भाषा में पूर्व मंत्री व राजद नेत्री डॉ. कांति सिंह ने कहा कि मैं इसी क्षेत्र की बेटी हूं. बेटी की हैसियत से मैं कार्य अब तक की हूं और आगे भी करती रहूंगी. मैं किसी भी पद पर रहूं या ना रहूं, लेकिन अपने शाहाबाद के लिए किसी भी कार्य में प्रयासरत जरूर रहूंगी. शाहाबाद के धरोहर व सोन नद के ऐतिहासिक महत्व बताते हुए कहा कि आज शाहाबाद के कई संतान विदेशों में शासक व प्रशासक बने हैं. उन्होंने भोजपुरी में गीत भी गाए.

नोखा के पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद चौरसिया ने अपने संबोधन में शाहाबाद की विशिष्टताओं को चिन्हित करते हुए कहा कि यहाँ का हर क्षेत्र अपने आप में एक अनमोल इतिहास छिपाए हुए है. पुरातत्ववेत्ताओं एवं इतिहासकारों का ध्यान इस पुरे क्षेत्र पर आजतक नहीं गया है. यह पूरा इलाका ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व से ओतप्रोत है.

महोत्सव के संयोजक अखिलेश सिंह ने कहा कि सभी धर्म और सम्प्रदाय से जुडी अनमोल धरोहरों एवं प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण इस इलाके को आज भी भगीरथ की प्रतीक्षा है. देश में शायद ही कोई दूसरा ऐसा क्षेत्र हो जो अपने आप में इतनी विविधता और विशेषताओं को छिपाए हुए हो.

गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के सचिव गोविंद नारायण सिंह ने कहा कि शाहाबाद महोत्सव एक शानदार आयोजन था. यह आयोजन प्रत्येक वर्ष शाहाबाद के विभिन्न स्थानों पर होना चाहिए. ताकि हमारी नई पीढी शाहाबाद के विरासत, संस्कृति, सभ्यता व शाहाबाद के महान विभूतियों के बारे में अवगत हो सके.



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