महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई है संझौली की मधु उपाध्याय

सासाराम के फजलगंज स्टेडियम में स्वच्छता दीप जलाने के दौरान डॉ. मधु उपाध्याय

संझौली प्रखंड के गांव खैरा भुतहा में जब नवब्याहता बहू के रूप में मधु उपाध्याय ने अपनी ससुराल में पांव रखे, तो सबसे पहले अपनी शैक्षणिक जागरूकता का परिचय दिया। अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उसके बाद बीएड भी किया। उसके बाद शोध छात्रा के रूप में सामाजिक चेतना के विकास में लालू प्रसाद के योगदान विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। शैक्षणिक यात्रा के बाद डा. मधु उपाध्याय ने अपने इलाके के सामाजिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक विकास के अलावा खासतौर से महिला सशक्तिकरण के लिए वर्ष 2016 में पंचायत चुनाव में हिस्सा लिया और संझौली प्रखंड की उप प्रमुख बन गईं। मुख्य भूमिका निभा कर अपने प्रखंड में पूरे सूबे में महज 52 दिनों में खुले में शौच अभियान को सफल बनाकर कीर्तिमान स्थापित किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद सूबे के पहले ओडीएफ प्रखंड बने संझौली प्रखंड में आए। महिला सशक्तिकरण को लेकर मधु उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए जिला प्रशासन ने उनको गुजरात के गांधी धाम में केंद्र सरकार द्वारा संयोजित राष्ट्रीय स्तर के श्रेष्ठ महिला सम्मेलन में प्रतिनिधि बनाकर भेजा था। उस सम्मेलन में मधु उपाध्याय ने ओडीएफ को लेकर आलेख भी पेश किया, जिसकी काफी चर्चा हुई।

उन्होंने रोहतास डिस्ट्रिक्ट से बातचीत में बताया कि, ओडीएफ को सफल बनाने के लिए सर्व प्रथम मैने गरीब एवं अशिक्षित लोगो की आबादी वाले टोलो(गांव)को चिन्हित की तथा वहाँ विशेष रूप से महिलाओं के बीच जनजागृति अभियान चलाकर इस अभियान मे अपना भरपूर सहयोग की।

वही उन्होंने महिलाओं के लिए कहा कि ओडीएफ अभियान विशेष रूप महिलाओं के लिए है। उन्होंने कहा रोहतास ही नहीं यहाँ से बाहर की महिलाओं को भी पुरानी सोच एवं कुप्रथा से ऊपर आकर अपने परिवार को प्रेरित कर शौचालय का निर्माण कराए तथा स्वच्छता को अपनाकर अपने जीवन को सफल करें।

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