अहमद का सासाराम की गलियों से निकलकर एसडीएम का सफर

कहते है कि मन मे विश्वास, दृढ़ इक्षाशक्ति हो तो मनुष्य के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है. आज हम बात करेंगे रोहतास जिले से बिहार प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए एसडीएम अहमद की. जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी अपनी लक्ष्य से समझौता किए बिना सफलता अर्जित की एवं यह भी जानने की कोशिश करेंगे युवाओं के बीच ऐसा क्या कर पाते है कि जहाँ भी जाते है वहीं चर्चा की केंद्र बिंदु हो जाती है.

आज हम चर्चा कर रहे नवनियुक्त एसडीएम अहमद अंसारी की. मूलतः कैमूर जिले के तेंदुआ के निवासी एमडी मुख्तार अंसारी के चार बेटो एवं  दो बेटियों में अहमद सबसे छोटे है. बातचीत के क्रम में नवनियुक्त एसडीएम अहमद ने बताया कि उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गांव से हुई है. उनके पिताजी कॉपरेटिव बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत है. फिलवक्त पूरा परिवार के दशकों से सासाराम में ही रहता है. चारो भाई में तीन बड़े भाई सरकारी सेवा में ही विभिन्न विभागों में कार्यरत है. शांत स्वभाव, मासूम चेहरा एवं तीखे तेवर वाले अहमद ने मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद पटना से अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखीं। पटना विश्वविद्यालय से हिस्ट्री से एमए किए. 56-59वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल कर बिहार नगर सेवा में पटना नगर निगम अंतर्गत अजीमाबाद सिटी अंचल में बतौर कार्यपालक पदाधिकारी कार्यरत है. अपने लगभग पांच महीनों के कार्यकाल से लोगो को काफी प्रभावित कर चुके अहमद ने पटना सिटी में विशिष्ट पहचान बनाया है नगर स्वच्छ एवं सुंदर कैसे रहे. इसके लिए औचक निरीक्षण कर संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाते तो, वहीं आमलोगो से भी जागरूकता के माध्यम से स्वच्छता की अपील करते. 60-62वीं की रिजल्ट आ जाने के बाद इनका चयन बिहार प्रशासनिक सेवा एसडीएम में हो गया है और ट्रेनिग के लिए इनका सहरसा जिला अलॉट हुआ है.

अहमद आगे बताते है कि पटना आने के बाद सिविल सर्विसेज के प्रति झुकाव बढ़ते गए. बताया कि हमारे चाचा गयासुद्दीन अंसारी 2004 बैच आईआरएस अधिकारी है. उनके गाइडेंस में हमलोग सिविल सर्विसेज के लिए लग गए. उनके मार्गदर्शन का मुझे एवं मेरे भाइयों का काफी लाभ मिला. “नवनियुक्त एसडीएम बनने के बाद प्राथमिकता क्या होगी” का जवाब देते हुए अहमद ने बताया कि मैंने गांव में गरीबी काफी नजदीक से देखा है.सरकार द्वारा इतनी लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती है. जिसका लाभ आमलोगों तक आसानी से नहीं पहुंच पाता है. यहाँ बच्चे को गर्भ में रहने से लेकर मरने के बाद तक भी योजना हैं ताकि कोई भी असक्षम व्यक्ति अपनी जरूरत पूरा करने तक के लिए सक्षम हो. बस कमी है तो लोगो मे जागरूकता की. मेरी प्राथमिकता होगी कि गरीब, लाचार, असक्षम लोगों को विभन्न तरह की लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाकर उन्हें लाभान्वित किया जाए.

सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्रों को सन्देश देते हुए अहमद ने बताया कि लगभग युवाओं का सपना सिविल सर्विसेज का होता है, लेकिन धीरे -धीरे दिन होते ही सपने जैसे गायब हो जाते है वैसे ही लक्ष्य टूटने लगता है. कुछ युवा ट्रैक बदल लेते है या तो कुछ फेरस्टेशन के शिकार हो जाते है. जरूरी नहीं कि पहले प्रयास में ही सफलता मिले. अपना एक लक्ष्य तय कर लें कि मुझे यह बनना है. उसी के अनुसार अपनी तैयारी में लग जाए. समय प्रबन्धन एवं सिलेबस के साथ-साथ पिछले कई वर्षों के प्रश्नों का आकलन निश्चित कर लेनी चाहिए. सफल होने के लिए एक ही मूलमंत्र है वह है मेहनत, अगर जो कड़ी मेहनत करेगा उसे सफलता निश्चित ही मिलेगी.

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