रोहतास का पराली प्रबंधन मॉडल बना नजीर, मिला राष्ट्रीय अवार्ड

फाइल फोटो: केवीके रोहतास द्वारा बनाया गया पराली बंडल

कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास के पराली (पुआल) प्रबंधन का प्रयास देशभर के लिए नजीर बन गया है. बिक्रमगंज स्थित केवीके रोहतास ने हर साल खेतों में जला दिए जाने वाले फसल अवशेष को पहले किसानों के लिए आमदनी का जरिया बनाया. साबित करके दिखाया कि किसान जिसे फालतू समझकर जला दे रहे हैं, उससे भी अच्छी कमाई हो सकती है. इस केंद्र ने बेलट से पराली का बंडल बनाकर शाहाबाद डेयरी को बेचा तो लागत से लगभग दोगुना लाभ हुआ. उसके बाद इसे उद्यम बनाने का निर्णय लिया गया. रोहतास के इस मॉडल को शुक्रवार को इको एग्रीकल्चर अवार्ड-2021 से सम्मानित किया गया. यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम द्वारा संपन्न किया गया. कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास के प्रधान व वरीय वैज्ञानिक रविन्द्र कुमार जलज ने पुरस्कार ग्रहण किया.

फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित राष्ट्रीय इको एग्रीकल्चर अवार्ड में केवीके रोहतास को सम्मान

इस वर्चुअल कार्यक्रम में बिहार सरकार के कृषि सचिव डॉ एन सरवन उपस्थित थे. उन्होंने जल जीवन हरियाली अंतर्गत जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत केवीके रोहतास द्वारा पराली को बंडल बनाकर बेचने हेतु शाहाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति आरा से टाइअप करने पर प्रशंसा की. उन्होंने पूरे मॉडल के बारे में विस्तार से बताया और इसे दूसरे जिलों में भी लागू करने का निर्देश दिया. विदित हो कि विभाग किसानों को पराली उद्योग के लिए प्रेरित कर रहा है. योजना के लिए बहुत काम करने की जरूरत भी नहीं है. किसान को सिर्फ बेलट से बंडल बनाना होगा बेलट की खरीदारी पर 75 फीसद अनुदान भी है. बंडल को दुग्ध उत्पादन समितियां खरीद रही हैं. पराली ऑफ सीजन में चारे के रूप में अच्छी कीमत में बिक रहा है.

किसान और कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल को अब कृषि विभाग रोजगार से जोड़ने की जुगत में है. बेलट के जरिए खेतों में पसरी पराली अब अच्छी कीमत देगी, जिसकी लागत काफी कम है. बेलट खेतों में पड़े धान के बचे अवशेष यानी पराली का गट्ठर तैयार करती है. इसका वजन 25 किलो से लेकर 40 किलो तक होता है. एक बीघा में 12 क्विंटल पुआल कृषि विभाग के निर्देश को प्राथमिकता देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास ने 50 एकड़ क्षेत्रफल में पराली प्रबंधन के तहत टाउंड स्ट्रालट मशीन से पराली का गट्ठर बनाता है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति आरके सोहाने ने बताया कि एक बीघा में धान लगे खेत से लगभग नौ से 12 क्विंटल पराली निकलती है.

फाइल फोटो: केवीके रोहतास द्वारा बनाया गया पराली का बंडल

बता दें कि केवीके रोहतास ने जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत दो ग्राम सुरहुरिया एवं जमोडी में पहली बार राउंड बेलर मशीन का प्रयोग कराया था. इस मशीन की मदद से 25 एकड़ क्षेत्रफल के पराली को उठाकर बंडल बनाकर शाहाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति को बेचा था. इस पूरे क्षेत्र में बिना पराली को जलाए हुए किसानों ने खेतों में गेहूं बोया था. केवीके रोहतास के प्रधान आरके जलज ने बताया कि एक एकड़ क्षेत्रफल में लगभग 1800 रूपये राउंड बैलर मशीन चलाने का खर्च आता है एवं 13 से 16 क्विंटल पुआल इकट्ठा होता है. दो प्रति किलोग्राम बेचने पर 2600 से 3200 रुपया कुल लाभ कमाया जा सकता है. इकट्ठा किए हुए पराली के बंडलो को पशु चारे के रूप में कुट्टी काटकर इस्तेमाल किया जाता है।.बरसात के महीने तक अगर इसे सुरक्षित रखा जाए तो पांच से छह हजार प्रति क्विंटल पशु चारा कुट्टी बिक सकता है. इससे पराली जलाए जाने वाले प्रदूषण से निजात मिल जाएगी एवं किसानों को पैसों की आमदनी भी होगी.

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