दक्षिण कोरिया से आए 108 बौद्ध भिक्षुओं का दल रोहतास में रात्रि प्रवास के बाद रवाना, सारनाथ से चले हैं पैदल, 43 दिनों में पहुंचेंगे बुद्ध के जन्म स्थान लुंबिनी

उत्तर प्रदेश के सारनाथ से पैदल तीर्थ यात्रा पर निकला दक्षिण कोरिया के 108 बौद्ध भिक्षुओं का दल बुधवार शाम रोहतास जिले के चेनारी पहुंचा, जहां बेनी सिंह महाविद्यालय के प्रांगण में पहुंचे दल का स्वागत प्रशासन द्वारा किया गया. बौद्ध भिक्षुओं का दल चेनारी में ही रात्रि प्रवास किया. बौद्ध भिक्षुओं की सुरक्षा में पुलिस अधिकारी व स्वास्थ्य सुरक्षा में मेडिकल टीम तैनात रही. महाविद्यालय परिसर में बनाए गए पंडाल के आसपास महिला और पुलिस बल की तैनाती की गई थी. उसके अंदर किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी.

कोरियाई बौद्ध भिक्षु के यात्री जब बेनी सिंह कॉलेज हट्टा के प्रांगण में पहुंचे तो मुख्य गेट पर तैनात थानाध्यक्ष निर्मल कुमार, सीओ निशांत कुमार ने हाथ जोड़कर बौद्ध भिक्षुओं का अभिवादन किया. विश्राम के बाद यह दल गुरुवार को सासाराम पहुंचा, जहां स्थानीय लोगों एवं कई संगठनों ने उनका स्वागत किया. इसके बाद दल बोधगया के लिए रवाना हुआ. बौद्ध भिक्षुओं की सुरक्षा में पुलिस अधिकारी व स्वास्थ्य सुरक्षा में मेडिकल टीम तैनात रही.

इतिहास में पहली बार कोरिया से इतनी बढ़ी संख्या में 108 बौद्ध भिक्षुओं का दल भारत में धार्मिक यात्रा के लिए आए हैं. जो पैदल यात्रा कर 43 दिनों में 1100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर भारत से नेपाल के लुंबनी जा रहे है. टीम गत 9 फरवरी को बोधगया से चली है, जो 21-22 फरवरी को बोधगया पहुंचेगी. उनके साथ चल रहे द्विभाषीय ने बताया कि बौद्ध भिक्षुओं का दल यूपी के सारनाथ से महात्मा बुद्ध की मूर्ति व अस्थि कलश को लेकर रथ पर चल रहा है. विश्राम करने व रवाना होने से पहले बौद्ध भिक्षु उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.

बताया कि भारत और दक्षिण कोरिया आपसी राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं. तीर्थयात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को बढ़ाना है. पर्यटक भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित बौद्ध तीर्थ स्थलों की यात्रा करेंगे और बाद में नेपाल के लुंबनी तक जाएंगे. तीर्थयात्रा के दौरान कवर किए जाने वाले स्थलों में बुद्ध के जन्म से लेकर उनके परिनिर्वाण तक का जीवन शामिल है. यात्रा का उद्देश्य भारत में बौद्ध पर्यटन सर्किट को दुनिया भर में प्रचारित किया जाना भी है.

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