सब्जी उत्पादन का हब बन रहा रोहतास का यह पहाड़ी इलाका

कहते हैं कि जहां चाह है वही राह है. इस बानगी को सच साबित कर रहे हैं धान के कटोरे की पहचान वाले रोहतास जिले के पहाड़ी तलहटी में बसे गांवों के किसान. कभी जिले के उग्रवाद प्रभावित रहे क्षेत्र चेनारी प्रखंड के पहाड़ी इलाका मल्हीपुर पंचायत के सैकड़ों किसान अपनी खास पहचान बना रहे हैं. यह पहाड़ी गांवों का इलाका इन दिनों सब्जियों के उत्पादन का बड़ा हब बनता जा रहा है. अब परंपरागत धान की खेती से हटकर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए सब्जी की खेती कर रहे हैं. कोरोना काल में आर्थिक क्षति की भरपाई कर खुद को फिर से खड़ा कर रहे हैं.

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रोड मार्ग से जुड़े होने के कारण जिले के अलावे औरंगाबाद एवं कैमूर जिले के व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंच रहे हैं. सीजन में बड़े पैमाने पर गोभी का उत्पादन इन इलाकों में हुआ था. उसकी सप्लाई कई जिलों में की गई थी. इन दिनों टमाटर का उत्पादन हो रहा है जिसकी सप्लाई बिहार और झारखंड के कई इलाकों में हो रही है.

खरीदार खेतों तक पहुंचकर सब्जी खरीद ले जाते हैं जिसका भुगतान नगद खेतों पर ही होता है. मल्हीपुर निवासी अमन सिंह और मोती पासवान बताते हैं कि विभिन्न जिलों से सब्जी उत्पादन वाले गांव में पहुंचने वाले व्यापारी किसानों के खेतों से सब्जियों को मंडी में बेचने के तुरंत बाद किसानों का भुगतान 24 घंटे के भीतर कर देते हैं.

किसानों के मुताबिक गोभी की खेती संतोषजनक रही थी. लेकिन टमाटर की खेती में बाजार भाव नहीं रहने से मुनाफा की उम्मीद नहीं है. लेकिन बाहरी व्यापारियों के आगमन से भविष्य में डिमांड बढ़ने की संभावना को देखते हुए इलाके के किसान आशान्वित हैं. किसानों ने बताया कि पानी की समस्या से फसल प्रभावित होती है. बिजली की भी पहुंच नहीं है. जेनरेटर के माध्यम से किसी तरफ फसल तक पानी पहुंचाया जाता है.

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