15वां रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा महोत्सव 27 को, जुटेंगे देशभर के वनवासी

फाइल फोटो: रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा महोत्सव

रोहतास जिले के कैमूर पहाड़ी पर अवस्थित रोहतासगढ़ किला पर इस वर्ष 27 फरवरी माघ पूर्णिमा को अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा 15 वां रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. इसे लेकर तैयारी जोरों पर है. तीर्थ यात्रा महोत्सव में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल, असम समेत अन्य राज्यों से वनवासी समुदाय के लोग आते हैं. वनवासी अपनी धर्म संस्कृति के अनुरूप किला परिसर में अवस्थित करम वृक्ष की पूजा-अर्चना करते है एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है.

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क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री महरंग जी उरांव ने बताया कि इस वर्ष 26 फरवरी को तीर्थ यात्रियों का आगमन प्रारंभ हो जाएगा, जिसमें बाहर से आए तीर्थयात्री सरस्वती विद्या मंदिर तिलौथू में विश्राम करेंगे. जबकि झारखंड व उत्तर प्रदेश के तीर्थयात्री रोहतास किला परिसर में विश्राम करेंगे. 27 फरवरी को धर्म संस्कृति रक्षा दौड़, करम वृक्ष की पूजा-अर्चना, कथा वाचन व बैगा, पाहन महतो एवं मुख्य अतिथियों का सम्मान समारोह के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खरारी, छत्तीसगढ़ के पूर्व वन मंत्री गणेश राम भगत, राज्यसभा सदस्य समीर उरांव, स्थानीय सांसद छेदी पासवान, एमएलसी संतोष सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे.

फाइल फोटो: रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा महोत्सव

बता दें कि जनश्रुतियों के अनुसार रोहतासगढ़ किला का निर्माण राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहिताश्व द्वारा किया गया था. वनवासी अपने पूर्वजों का यह किला मानते हैं. यहां असम, बंगाल, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, झारखंड प्रांत से वनवासी समुदाय के लोग प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा को अपने पूर्वजों की धरती को नमन करने आते हैं.

फाइल फोटो: रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा महोत्सव

वनवासी समुदाय उरांव, खरवार का मानना है कि हमारा उदगम स्थल रोहतासगढ़ ही है. जहां से मुगल काल में युद्ध में हार के बाद विस्थापित हो हमारे पूर्वज इस धरती से भारत के अन्य प्रांतों में जाकर बस गए थे. किला परिसर में एक अति प्राचीन करम का वृक्ष है, जिसकी पूजा अर्चना के लिए आदिवासी समुदाय के लोग यहां आते हैं और अपने पूर्वजों की धरती को नमन करते है. साथ ही भारत के विभिन्न भागों के अलावे मारिसस, सुरीनाम आदि देशों में कालापानी सजा के दौरान बस चुके आदिवासी समाज के लोग रोहतास किला की मिट्टी को ले जाकर अपने घरों में रखना अपना सौभाग्य समझते हैं.

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