पिता के अनुशासन और प्रेरणा से अमित रंजन को मिला आईपीएस का मुकाम

सफलता प्राप्त करने वाले हर व्यक्ति की अपनी एक कहानी होती है, जिसमें कई उतार-चढ़ाव होते हैं. भले ही लोगों को उनका सफर आसान लगता है, लेकिन ज्यादातर लोग सफल होने के लिए कई कठिन दौर से गुजरते हैं. ऐसी ही एक कहानी यूपीएससी परीक्षा पास करके आईपीएस ऑफिसर बन नोखा थाना में कार्यरत थानाध्यक्ष युवा अमित रंजन की है, जिन्होंने अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की. अमित आईपीएस बने तो पिता के द्वारा दिए गए अनुशासन के चलते. बोले पिता की प्रेरणा सलाह और अनुसरण किया उन्हे मंजिल मिल गई.

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रोहतास जिले के नोखा थाना में थानाध्यक्ष पद पर तैनात युवा अमित रंजन आईपीएस हैं. इनका मानना है कि आज वे इस मुकाम पर अपने पिता अनंत राम के अनुशासन और प्रेरणा की बदौलत हैं. उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के जाजूपुर गांव के मूल निवासी अमित रंजन कहते हैं कि उनके पिता अनंत राम सचिवालय में कार्यरत है. पिता के परिश्रम व मेहनत ने हमे देश के लिए कुछ करने का जज्बा दिया. कठोर अनुशासन प्रिय पिता ने हमें अनुशासन का पालन करने की सीख दी. अमित की 12 वीं तक की पढ़ाई लखनऊ के मोंटफोर्ट इंटर स्कूल में हुई. इसके बाद पिता की प्रेरणा से उनकी रुझान प्रशासनिक सेवा की ओर हुआ. ग्रेजुएशन के साथ ही यूपीएससी की तैयारी में लग गए. लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. ऑप्शनल सब्जेक्ट सोशियोलॉजी था, जिसकी वह कोचिंग लेते थे. बाकी सब्जेक्ट की सेल्फ स्टडी करते थे. उनकी मेहनत रंग लायी और वह 2017 में यूपीएससी की परीक्षा में 754वां रैंक लेकर सफल रहे. अमित कहते है कि सिविल सर्विसेज की तैयारी करने के लिए धैर्य बहुत जरूरी है.

उन्होंने अपने पिता के बारे में बात करते हुए कहा कि हमारे पिता सरकारी सेवा में है. मुझे बचपन से ही पिता बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे. सरकारी सेवा में होने और उस दौर में कार्यों के दबाव अधिक होने के बाद भी पिता यदि देर से भी घर आते थे, तो वे मुझे उठाकर प्यार से बातें करते. इसके बाद हमने स्कूल में क्या पढ़ा, घर पर क्या पढ़ाई की इसकी जानकारी लेते थे. पिता के अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा ने भारतीय पुलिस सेवा में मुकाम हासिल करने में काफी मदद की. उन्होंने नोखा थाना में प्रशिक्षण के कार्य अनुभव करते हुए कहा कि थानास्तर पर बहुत कुछ सीखने को मिलता है. थाने के प्रति लोगों की उम्मीद, थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों को किन समस्या से जूझना पड़ता है.

अमित रंजन ने अपनी तैयारी का जिक्र करते हुए युवाओं के लिए कहा कि तैयारी के लिए रोजाना तय नहीं कर सकते हैं कि कितने घंटे पढ़ाई करेंगे. इसके लिए बस एक चीज की जरूरत है कि आप कितने कंसिस्टेंट हैं. यानी चाहे कुछ भी हो लगातार आपका फोकस बना रहना चाहिए. इसके अलावा टाइम मैनेजमेंट भी काफी जरूरी है. उन्होंने कहा कि युवा ही देश के भविष्य है. अपने बैकग्राउंड को लेकर कभी खुद को कमतर न समझें. हार्डवर्क, सही डायरेक्शन और सही मोटिवेशन आपको परीक्षा में सफल बनाते हैं लेकिन प्रयास भले धीमा हो पर रोज होना चाहिए. फैमिली फंक्शन, फेस्टिवल वगैरह कुछ भी हो आपका पढ़ाई का रूटीन नहीं बिगड़ना चाहिए. मोबाइल का उपयोग भी सही कार्यों में करना चाहिए.

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