गड्ढे में तब्दील रोहतास के अमरा-बभनपुरवां पथ से जुड़े ग्रामीणों ने जताया विरोध

अमरा-बभनपुरवां पथ से जुड़े ग्रामीण विरोध जताते

जिले में विकास को ले विरोध की आवाज मुखर होने लगी है. गांव-गांव तक सड़क, पानी, बिजली, स्कूल की जाल बिछाने के दावे के बीच अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. क्षेत्र के लोग अब अपनी बारी की बात कह वोट बहिष्कार को आवाज बुलंद करने लगे हैं. कुछ ऐसा ही विरोध की आवाज नौ किलोमीटर लंबे अमरा-बभनपुरवां पथ से जुड़े गांवों के ग्रामीणों ने रविवार को उठाई. पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील इस सड़क पर जमे गंदे पानी में ग्रामीण शाहपुर गांव के पास बैठ ‘सड़क नहीं, तो वोट नहीं’ के नारे को बुलंद किया.

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ग्रामीण जयराम सिंह के नेतृत्व में विभिन्न गांवों के दर्जनों पुरूष-महिला इकट्ठा हो क्षेत्र के सांसद व विधायक के प्रति नाराजगी जताई. ग्रामीणों की माने तो तीन दशक से यह सड़क पूरी तरह उपेक्षित है. जब चुनाव आता है तो हर दल के नेता इस सड़क को बनाने का वादा करते हैं. परंतु चुनाव जीत कर जाने के बाद वे अपने वादे को भूल जाते हैं. कहा कि जब मुख्य सड़क ही ठीक न हो तो संपर्क पथ चकाचक होकर क्या करेगा. जनप्रतिनिधि को विकास की बात तब याद आती है जब चुनाव आता है. शायद यही वजह है कि हाल के महीनों में सिर्फ शिलान्यास का दौर चला. लेकिन योजनाओं पर कब काम शुरू होगा यह कोई नहीं जानता.

अमरा तालाब निवासी ब्रजकिशोर गुप्ता ने कहा कि यह सड़क पूरी तरह से हर किसी के लिए चुनावी मुद्दा बन कर रह गया है. जनता जब सड़क का मुद्दा उठाती है तो चुनाव लड़ने वाले नेता बनाने का वादा करते हैं और जीतने के बाद भूल जाते हैं. पांच साल तक वे झांकने तक नहीं आते हैं. जबकि अमरा-बभनपुरवां पथ से करवंदिया, अमरी, रामपुर, नहौना, गंसाडीह, आकाशी व करूप पंचायत पांच दर्जन से अधिक गांव जुड़ा है.

वहीं, डेहरी विधानसभा के अकोढ़ीगोला प्रखंड के गोवर्धनपुर गाँव के ग्रामीणों ने भी ‘रोड गली नली नहीं, तो वोट नहीं’ के नारे के साथ ग्रामीणों ने जुलुश निकाला. ग्रामीण विनय सिंह ने कहा कि हम सभी के होश से लेकर आज तक गाँव में विकास कार्य नहीं हुआ है. एक भी विकास योजना को इस गाँव में साकार नहीं किया गया है. हमारे गाँव के गलियों का पक्कीकारण नहीं किया गया है. इस गाँव में दो मतदान केंद्र हैं, जिस पर लगभग छह हजार से अधिक मतदाता वोट देते हैं. लेकिन, इस बारहम मतदान नहीं करेंगे. ग्रामीणों का यह भी  कहना है कि चुनाव में हरदल के प्रत्याशी आते हैं. विकास कार्य कराने का आश्वासन देते हैं. लेकिन, चुनाव में जीत हो जाने के बाद इस गांव का रास्ता भूल जाते हैं. लाचारी में हमलोगों ने मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. इसकी जानकारी प्रशासन को भी दे दी जाएगी.

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