नए साल का जश्‍न मनाना हो तो आइए रोहतास की व‍ादियों में, दुर्गावती डैम को निहारते रह जाएंगे

नए साल का जश्‍न मनाने की तैयारी में युवा जुट चुके हैं. पिकनिक स्‍पॉट का चयन किया जा रहा है. ऐसे में रोहतास जिले के दुर्गावती जलाशय की बात न करें तो ये बेमानी होगी. नए साल का जश्‍न मनाने के लिए यह पसंदीदा पर्यटन स्थल साबित होने लगा है. यहां रोहतास-कैमूर जिले के अलावे राजधानी पटना समेत अन्य जगहों से भी हजारों लोग पहुंचते हैं. पर्यटक यहां के प्रकृति की सुंदर वादियों, कलकल बहती नदी की धारा में पंक्षियों की चहचहाहट, चारों तरफ से हरे-भरे पेड़ व पहाड़ की चट्टानों पर चढ़ कर घूमना लोग काफी पसंद करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना का असर रहेगा. जल्द कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीदों के बीच अभी भी लोगों को पूरी सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है.

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रोहतास एवं कैमूर जिले की सीमा पर अवस्थित यह डैम अपनी रमणीयता व प्राकृतिक सुंदरता को ले पूर्व से ही आकर्षण का केंद्र रहा है. अब विशेष उत्सवों पर या अवकाश के दिनों में दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. प्रकृति की गोद मे बसे जलाशय की धारा और पहाड़ों के सुंदर दृश्य को देख लोग मोहित हो जाते हैं. पर्यटक राजादेव टोंगर की पहाड़ी के बैकग्राउंड के साथ तस्वीरें लेने से नहीं चुकते हैं. सिंचाई के उद्देश्य से निर्मित दुर्गावती जलाशय परियोजना के विकास में ऐसे तो बहुत कार्य हुए, लेकिन यहां आने वाले लोगों के लिए कई सुविधाओं की कमी है.

दुर्गावती जलाशय रोहतास के शेरगढ़ पहाड़ी व कैमूर के करमचट के पास राजादेव टोंगर की पहाड़ी के बीच से निकलने वाली दुर्गावती नदी पर बना है. इस जलाशय की खास बात यह है कि इसके पूर्वी तट पर शेरगढ़ का प्राचीन भूमिगत किला है. जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.

शेरगढ़ किला प्रवेश द्वार

दुर्गावती जलाशय घूमने आए लोग शेरगढ़ किला को देखना नहीं भूलते. यहां से कुछ ही दूरी पर भुड़कुड़ा का प्राचीन किला भी सैकड़ों वर्षो से विद्यमान है. शेरगढ़ किला की ऊपरी हिस्से से दुर्गावती जलाशय का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है. वहां जाने वाले सैलानियों को भ्रमण के लिए पूरा एक दिन भी कम पड़ जा रहा है.

शेरगढ़ किला की ऊपरी हिस्से से दुर्गावती जलाशय का विहंगम दृश्य

जिले के चेनारी प्रखंड मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर पहाड़ी के बीच दुर्गावती जलाशय है. यहां से सटे सारे गांव के विकास की रफ्तार काफी पीछे है. दुर्गावती जलाशय से लगभग 12 किलोमीटर के एरिया में कोई बाजार नहीं है. इसके चलते यहां आने वाले लोगों को खाने-पीने सहित पिकनिक मनाने में आवश्यक सामग्रियों को चेनारी बाजार से ही लेकर आना पड़ता है. दुर्गावती जलाशय पर शौचालय पेयजल आदि की सुविधा भी अब तक नहीं हो सकी. इसके चलते यहां आने वाले लोगों खासकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

नए साल के अवसर पर जश्‍न मनाने के लिए तो यहां पूर्व से ही पर्यटकों की भीड़ लगती रही है. लेकिन वर्ष 2014 में उद्घाटन के बाद से यहां का नजारा बदल गया है. गत वर्ष भी यहां जिले के कोने-कोने से डीजे, साउंड बाक्स सहित अन्य म्यूजिक सिस्टमों के साथ पहुंची युवकों की टोली ने जमकर धमाल मचाया था. प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी पिकनिक का लुत्फ उठाने पहुंचे थे.

दुर्गावती जलाशय पर नववर्ष को ले होने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वहां सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम कर रहा हैं.  चिकित्साकर्मियों से युक्त एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की जा रही है. जिससे पिकनिक मनाने वालों को किसी तरह की परेशानी न हो. पिकनिक स्पाटों पर पुलिस व उत्पाद विभाग की पैनी नजर पियक्कड़ों पर रहेगी. इसके लिए सादे लिबास में कर्मियों को तैनात किया है. वहीं गंदगी फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी. डीएफओ प्रद्युमन गौरव की मानें तो इसके लिए सभी तैयारियां पूरी की जा रही है.

मालूम हो कि इस जलाशय के निर्माण में कई प्रकार की अड़चने आई. लेकिन 38 वर्ष बाद 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने दुर्गावती जलाशय परियोजना का उद्घाटन किया गया. रोहतास व कैमूर के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 1976 में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम ने इसकी नींव रखी थी. इसके बाद से यह जलाशय एक राजनीतिक मुद्दा बना और सासाराम संसदीय क्षेत्र में प्रत्येक पार्टी इसी जलाशय को मुद्दा बना कर अपनी नैया पार करने की कोशिश करता रहा. अंतत: इसके उद्घाटन का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को गया.

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