रोहतास का यह गांव अनदेखी का मारा, एम्बुलेंस की जगह डोली का सहारा

आधुनिक युग में लोगों को हेलीकॉप्टर एंबुलेंस तक की सुविधा मिलने लगी है. लेकिन, पहाड़ का जीवन आज भी पहाड़ जैसी चुनौतियों से भरा है. जिस गांव के नाम से जिला का नाम रोहतास रखा गया वह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से मरहूम है. न आने-जाने का रास्ता, ना ही उच्च शिक्षा या चिकित्सा की व्यवस्था. 1580 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसे रोहतास मौजा थाना संख्या-680 प्रखंड रोहतास में पड़ता है. यह गांव रोहतास जिले की कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है. जिसकी जनसंख्या 4580 है. इस गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं.

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विश्वस्तर के पर्यटन स्थल रोहतासगढ़ किला परिसर में बसे इस गांव में सड़क के अभाव के कारण मरीजों को डोला-खटोला के माध्यम से मैदानी इलाकों के अस्पताल तक पहुंचाने को ग्रामीण विवश है. इनकी यही एम्बुलेंस है. जब की सरकार की हर गांव तक एबुलेंश सेवा उपलब्ध कराने की सोच है. कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. नागा टोली में नाम के स्वास्थ्य उपकेंद्र है. जो सदैव बंद रहता है. वहां पर नियुक्त एएनएम कभी कभार ही गांव में दिखाई देती हैं. 1580 फीट की ऊंचाई पर बसे होने के कारण आने-जाने का एक मात्र रास्ता पहाड़ी घाटी है. राज घाट, मेढ़ा घाट से पैदल उतर कर यहां के लोग रोहतास एवं बौलिया में रोगी के इलाज हो या आवश्यता की सामग्री खरीदने आते हैं. इस गांव के निवासी पूर्व मुखिया कृष्णा सिंह यादव, बालेश्वर भुइया,अजय भुइया सुरेन्द्र उरांव कहते हैं कि आज भी बीमारी हालत में डोली-खटोली के माध्यम से मरीज को अस्पताल लाना पड़ता है. यातायात, चिकित्सा, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है.

मरीज को लेकर नागा टोली गांव से घाटी उतरते लोग

बता दें कि वर्ष 2012 में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं 11 फरवरी 2016 को तत्कालीन राज्यपाल एवं वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक भी रोहतासगढ़ किला घूमने आए थे. ग्रामीणों से मिलकर समस्याएं भी सुनी थीं. यहां शिक्षा, चिकित्सा, यातायात की दरकार भी महसूस की थी. किन्तु यहां के लोगों की किस्मत कहे यहां नीतीश कुमार को छोड़ जिसने भी आश्वाशन दिए सभी का स्थानांतण हो गया. इन गावों में कई बार जिला पदाधिकारी भी आ चुके हैं, लेकिन गांव की तकदीर अभी तक नहीं बदल सकी.

रोहतास प्रखंड विकास पदाधिकरी मनोज कुमार कहते हैं कि चिकित्सीय सेवा शुलभ कराने की पहल की जा रही है. सड़क के अभाव एम्बुलेंस सेवा शुलभ नहीं की जा सकता है. सड़क निर्माण में भौगोलिक बनावट एरिया होना बाधक है.

रिपोर्ट: प्रेम पाठक

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