जिस घड़ी में समय देखकर सोन नहर प्रणाली का हुआ था निर्माण, उसी घड़ी का धातु प्लेट उखाड़ ले गए चोर

जांच करती डॉग स्क्वायड की टीम

रोहतास जिले के डेहरी के एनीकट रोड में सिंचाई विभाग यांत्रिक कर्मशाला कार्यालय के पास स्थापित 151 साल पुरानी ऐतिहासिक धूप घड़ी को मंगलवार रात चोर उखाड़ कर ले गए. जब बुधवार की सुबह में लोग टहलने के लिए एनीकट पहुंचे, तो कुछ लोगों की नजर धूप घड़ी पर पड़ी, तो देखा कि धूप घड़ी के धातु की तिकोनी प्लेट वहां से गायब है. यह खबर पूरे जिले से लेकर सोशल मीडिया पर जंगल के आग की तरह फैल गई. लोगों ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी.

डेहरी नगर थाना की पुलिस संभावित ठिकानों पर छापामारी करने में जुटी है. धूप घड़ी चोरी के मामले में शाहाबाद डीआईजी के अंतर्गत डॉग स्क्वायड टीम द्वारा स्थल की जांच की गई. डॉग स्क्वायड टीम के सब इंस्पेक्टर बबलू कुमार गुप्ता व मिथिलेश कुमार कौशल के नेतृत्व में कई स्थलों पर डॉग स्क्वायड की टीम ने अभियान भी चलाया. किंतु पुलिस को अब तक इसमें सफलता हाथ नहीं लगी है. हालांकि इस मामले में पुलिस संदेह के आधार पर संभावित चोरों के ठिकाने व शहर के कई कबाड़खाने में छापेमारी कर रही है. एसपी आशीष भारती ने धूप घड़ी के स्थल पर पहुंच कर जांच पड़ताल की.

एसपी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईठी का गठन कर कार्रवाई शुरू किया गया है, जल्द ही धातु की तिकोनी प्लेट की रिकवरी कर ली जाएगी. उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग के तीन कर्मी सुरक्षा के लिए प्रतिनियुक्त रहते थे, परंतु कल शाम से वे अपने ड्यूटी पर नहीं थे और अभी भी जांच के दौरान वे यहां पर नहीं है. लापरवाही जिनके द्वारा की गई है, उसके संबंध में संबंधित विभाग को भी पत्राचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जांच के लिए एफएसएल की टीम भी बुलाई गई है.

विदित हो कि शहर का यह यह इलाका अति सुरक्षित माना जाता है. इसी इलाका में शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी, रोहतास के एसपी, एएसपी सहित तमाम आला पुलिस अधिकारियों के कार्यालय और आवास भी हैं. 24 घंटे इस मार्ग पर पुलिस अधिकारियों व कर्मियों का आना-जाना लगा रहता है. ऐसे में ऐतिहासिक धूप घड़ी की चोरी को लेकर लापरवाही पर कई सवाल उठ रहे हैं. बता दें कि 1871 में सोन नहर प्रणाली के निर्माण के समय बने सिंचाई यांत्रिक कर्मशाला में कार्यरत कर्मियों के अलावे आइटीआइ के छात्रों को समय देखने का काम आता था. उस समय एनीकट से निकले सोन नहर प्रणाली का निर्माण इसी धूप घड़ी के समय के आधार पर मजदूरों ने किया था.

अभी भी उस रास्ते से आने-जाने वाले स्थानीय लोग इसके जरिए समय की जानकारी लेते हैं. इस घड़ी में सूरज के प्रकाश के साथ-साथ समय का पता चलता है. लेकिन डेढ़ सौ वर्ष पुरानी घड़ी तब से लगातार आज भी लोगों को सही समय बताने का काम कर रही थी. हालांकि रखरखाव के अभाव में इस धरोहर को नुकसान पहुंच रहा था. हाल ही जिला प्रशासन ने इस घड़ी को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजा था. चबूतरे पर स्थापित धूप घड़ी में रोमन और हिंदी में अंक अंकित है. इस पर सूर्य के प्रकाश से समय देखा जाता था. इसी के चलते इसका नाम धूप घड़ी रखा गया था.

केपी जयसवाल शोध संस्थान के शोध अन्वेषक का कहना है कि जब घड़ी आम लोगों की पहुंच से दूर थी तब इसका बहुत महत्व था. यह ऐसा यंत्र है, जिससे दिन में समय की गणना की जाती है. इसे नोमोन कहा जाता है. यंत्र इस सिद्धांत पर काम करता है कि दिन में जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की तरफ जाता है. उसी तरह किसी वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की तरफ चलती है. सूर्य लाइनों वाली सतह पर छाया डालता है, जिससे दिन के समय घंटों का पता चलता है.

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