सासाराम सदर अस्पताल में पावर कट मामले में तीन पर कार्रवाई, सिविल सर्जन को हटाने के लिए डीएम ने लिखा पत्र

रोहतास जिले के सदर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में गत 3 जून को गोली लगे मरीजों के इलाज के दौरान बिजली चली गई थी, जिसके बाद मोबाइल टॉर्च के रौशनी में इलाज शुरू किया गया था. विद्युत आपूर्ति बाधित रहने के कारण मरीजों के इलाज में हुई कठिनाई संबंधी वीडियो वायरल होने के बाद मामले में डीएम धर्मेंद्र कुमार ने जांच कमेटी का गठन किया था. अब जांच रिपोर्ट आने के बाद कई कर्मियों पर कार्रवाई की गई है. डीएम के इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.

इस संबंध में शुक्रवार जानकारी देते हुए डीपीआरओ ने बताया कि जांच दल द्वारा स्थलीय जांच के बाद प्रतिवेदन किया गया है कि 3 जून को सुबह 3.53 से 4.03 बजे तक एवं रात में 10.12 से 10.43 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित थी. ट्रामा सेंटर में विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एक जेनरेटर पाया गया. जांच के क्रम में सासाराम विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिवेदित है कि एमसीबी में तकनीकी खराबी के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो रही थी.

रिपोर्ट के आलोक में डीएम ने लापरवाही को लेकर सदर अस्पताल के कार्यकारी अधीक्षक एवं जिला स्वास्थ्य समिति के जिला योजना समन्वयक डीपीसी से शो-कॉज किया गया है. चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ब्रजेश कुमार द्वारा मामले में मीडिया से दिए गए गलत बयान के लिए उनके विरुद्ध अग्रतर कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा गया है. साथ ही डीएम ने सिविल सर्जन को हटाने की मांग की है. स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही लापरवाही को लेकर डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. डीएम ने राज्य के अपर मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि सिविल सर्जन रोहतास डॉ अखिलेश कुमार को यहां से हटा कर किसी अन्य सिविल सर्जन की पदस्थापना की जाए.

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के वजह से सदर अस्पताल के एसएनसीयू में तीन दिन पूर्व सभी नौ एसी खराब हो गए थे. एसी खराब होने की वजह से एक नवजात शिशु की मौत भी हो गई थी. दरअसल एसी खराब होने के कारण अस्पताल के नर्सिंग वार्ड में रेडीयंट वार्मर बार-बार बंद हो जा रहा था, जिसकी वजह से नवजात बच्चों को बहुत तकलीफों का सामना कर पड़ रहा था. हालांकि अब इसे सुधार लिया गया है.

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