सामाजिक पहल ने बदल दी नोखा के मुक्तिधाम की सूरत

नोखा के दहासिल के पास स्थित मुक्तिधाम

शासन, प्रशासन व नप सालों से मुक्तिधामों के विकास की बातें व वादा कर रहीं है. लेकिन किसी भी मुक्तिधाम की तस्वीर नहीं बदली. लेकिन जैसे ही समाज के लोग इनकी तस्वीर बदलने के लिए आगे आए, नोखा के मुक्तिधाम की तस्वीर गई. नोखा शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने हाल ही में दहासिल के पास स्थित मुक्तिधाम की तस्वीर जनभागीदारी के सहयोग से बदल दी. वह भी ऐसी कि मुक्तिधाम, मुक्तिधाम नहीं, किसी उद्यान सा नजर आ रहा है. लगभग एक साल के अथक श्रम से मुक्तिधाम को नया स्वरूप प्रदान किया है. परिसर को जन सहयोग से सर्व सुविधा युक्त बनाने का पूरा प्रयास किया गया है. शुक्रवार को ही इस मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण का उद्घाटन हुआ है.

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मुक्तिधाम परिसर में जनसहयोग से मुख्य गेट, शव सम्मान स्थल, शव दाह स्थल, मुंडन स्थल, सीमेंट की कुर्सियां सहित अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है. साथ ही सुविधाओं को लेकर निरन्तर कार्य किये जा रहे हैं. परिसर में सुविधा विस्तार में बढ़ चढ़कर जन सहयोग मिला है और निरन्तर मिल रहा है. इससे नगर के कभी वीरान पड़े हिस्से भी आकर्षण का केंद्र बन गए हैं. श्रमवीरों के जज्बे ने साबित किया है कि खुद जिम्मेदारी उठा लेने से अपने आसपास के हिस्सों तस्वीर कैसी बदली जा सकती है.

नोखा में इस मुक्तिधाम के निर्माण में प्रबुद्ध नागरिकों का योगदान भी रहा है. जिनमें मुख्य रूप से माखन चौधरी, सूर्यदेव प्रसाद शौण्डिक, श्यामलाल सिंह, अनिल हिन्दू, अरुण कुमार शौण्डिक, बहादुर प्रसाद, भगवान शर्मा, अच्छेलाल प्रसाद व अन्य है. इसके निर्माण में एवं साफ-सफाई रखने के लिए मैत्रिये फुटबॉल महिला टीम का भी काफी योगदान रहा. जो प्रत्येक रविवार को सफाई का काम करती थी.

मुक्तिधाम के उपाध्यक्ष श्यामलाल सिंह ने बताया कि नोखा का यह मुक्तिधाम जिले में पहला ऐसा मुक्तिधाम है, जिसमें हर तरह से साधन युक्त बनाया जा रहा है, ताकि लोगो को दाह संस्कार करने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े. धीरे-धीरे जनभागीदारी से इस मुक्तिधाम में काफी अच्छा एवं अत्याधुनिक बनते जा रहा है. उन्होंने मुक्तिधाम से लगे छोटे तालाब की सौंदर्यीकरण करने की भी बात कही है. फिलहाल उक्त हिस्सा गंदगी से पटा रहता है. जिसे धीरे-धीरे कर साफ किया रहा है. उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम परिसर के भीतर औषधीय पौधे लगाने की भी योजना बनायी गई है. जिनमें निर्गुण्डी,पत्थर चट्टा, तुलसी, स्टीविया, अश्वगंधा शामिल हैं.

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