आजादी के लिए आज ही के दिन कुर्बान हो गए थे रोहतास के चार युवा, पढ़ें शहादत की पूरी कहानी

देश की आजादी में रोहतास जिला का भी विशेष योगदान है. 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के शंखनाद से प्रेरित होकर रोहतास के चार क्रांतिकारी वीरों ने आज ही के दिन 1942 में शहादत दी थी. शहादत स्थल पर निर्मित गांधी स्मारक वीर सपूतों की याद दिलाता रहता है. रोहतास जिले में भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर 11 अगस्त 1942 को नौजवानों का विशाल समूह जनक्रांति में परिवर्तित हो गया था.

उस समय सासाराम में रेलवे स्टेशन जला दिया गया, सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा लहरा दिया गया. 12 अगस्त को डॉ. राम सुभग सिंह के नेतृत्व में हजारों छात्रों के आने से क्रांति हुंकार करने लगी. सासाराम हाई स्कूल के फाटक पर छात्रों ने धरना देकर स्कूल को बंद रखा. 13 अगस्त को टाउन हाई स्कूल के क्रांतिकारी छात्र दरगाही राम ने दीवानी न्यायालय पर तिरंगा फहरा दिया था. तिरंगा फहराने की योजना के एक दिन पूर्व यानि 12 अगस्त की रात छात्रों ने गुप्त स्थान पर इसकी रणनीति बनाई थी. 13 अगस्त को ही दानापुर से ब्रिटिश फौजियों का दल सासाराम आ धमका.

14 अगस्त को दिन के करीब 11:30 बजे टाउन हाईस्कूल के पास से छात्रों का एक जुलूस निकला. एसडीओ मि. मार्टिन ने जुलूस पर लाठी चार्ज करा दिया. जो नहीं भागे, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. एसडीओ पुनः स्कूल गेट पर आ धमका और नेतृत्वकर्ता बचरी निवासी जगदीश प्रसाद नामक विद्यार्थी को सीधे गोली मार दी. इलाज के क्रम में ही वे शहीद भी हो गए. गोली की घटना के बाद जीटी रोड एवं धर्मशाला के पास ब्रिटिश फौज तथा जनता में भयंकर मुठभेड़ हो गई. जहां ब्रिटिश फौजियों ने गोली चार्ज कर दिया और तीन दीवाने कउपा के 20 वर्षीय जैराम सिंह, सासाराम के 22 वर्षीय महंगू राम एवं दनवार के 19 वर्षीय जगन्नाथ राम चौरसिया गोली खाकर शहीद हो गए.

जबकि सासाराम के कोठाटोली मोहल्ले के बृजकुमार लाल, मोहल्ला के मंडई के जवाहर भगत, टकसाल संघत के गौ सिंह, चंवरतकिया के लक्ष्मण यादव, खिड़की घाट के देऊ राम, लश्करीगंज के गुलाब राय, महावीर स्थान के शिवपूजन सिंह, लखुनसराय के रामकीरित महतो तथा करगहर गांव के मुसाफिर राम गोली लगने से घायल हुए थे. सासाराम के धर्मशाला चौक स्थित गांधी स्मारक पर शहीदों का नाम तख्ती पर लिखकर अंकित किया गया है, जो इनकी शहादत को याद दिलाती है.

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