अब पर्यटन के मानचित्र पर उभरेगा मांझर कुंड, पुरानी है यहां पिकनिक मनाने की परंपरा

रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से महज 12 किलोमीटर दूरी पर कैमूर पहाड़ी की गोद में स्थित मांझर कुंड अब पर्यटन के मानचित्र पर भी उभरेगा। यहां देश-विदेश के पर्यटक आएं, इसके लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। वहां पहुंचने के लिए दुर्गम रास्ते की जगह पक्की सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वहीं पर्यटन विभाग ने भी विकास कार्य के लिए 2.89 करोड़ रुपये आवंटित किया है।

मनोरम वादियों के बीच स्थित मांझर कुंड को ताराचंडी-गुप्ताधाम मार्ग से जोड़ा जाएगा। जिससे पर्यटक यहां आसानी से पहुंच सकें। वन विभाग के अंतर्गत आने वाले इस पथ की मरम्मत करने के लिए पर्यटन विभाग ने 2.89 करोड़ रुपये जारी कर दिया है। इस योजना के मुताबिक ताराचंडी-गुप्ताधाम संबंधी वन पथ का स्पीलवे निर्माण, 43 किलोमीटर पथ का मरम्मत व 14 किलोमीटर तक विशेष कार्य किया जा रहा है।

मांझर कुंड जाने का रास्ता

वहीं बरसात के दिनों में कैमूर पहाड़ी से गिरने वाले जल प्रपात मांझर कुंड का दृश्य मनोरम तो होता ही है, साथ ही खतरनाक भी हो जाता है। अचानक आए बरसाती पानी की चपेट में आ हर वर्ष कई लोग तेज प्रवाहित धारा में बह जान गंवा देते हैं। विभाग ने ऐसी स्थिति से बचने के लिए वहां रेलिंग व चारदीवारी निर्माण की योजना बनाई है। जिसके लिए 3.16 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं।

मांझर कुंड जाने का रास्ता

आपको बता दें कि, सावन पूर्णिमा के बाद पड़ने वाले पहले रविवार को पिकनिक मनाने की चली आ रही परम्परा के तहत यहां लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। जिले के विभिन्न हिस्सों के अलावा दूर-दराज व अन्य प्रांतों के लोग भी प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पिकनिक मनाने का लुत्फ उठाने यहां पहुंचते हैं।

इस विषय पर राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार कहते हैं कि, “रोहतास जिला ऐतिहासिक, धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों से समृद्ध है। मांझर कुंड की प्राकृतिक छटा लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए विभाग ने इसके लिए कवायद भी शुरू कर दी है। मांझर कुंड के पास पर्यटकों को ठहरने, कैफेटेरिया व अन्य कार्य कराया जाएगा। जिससे वाराणसी व गया आने वाले विदेशी पर्यटक भी यहां आएं। इसके विकास का खाका तैयार कर लिया गया है।

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