पांच हजार रुपये से रखी गई थी सासाराम के कारगिल स्मृति स्थल की नींव

सासाराम समाहरणालय परिसर में स्थित कारगिल विजय स्मृति स्थल

आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है और कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीरों को याद कर रहा है. आज ही के दिन 21 साल पहले भारत ने करगिल युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाई थी. इसीलिए 26 जुलाई हर साल कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. करीब दो महीने चला करगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था. भले ही कारगिल युद्ध में रोहतास जिले के लाल शहीद न हुए हों, लेकिन यहां रणबांकुरों के प्रति असीम प्रेम व श्रद्धा है. वे शहीद सैनिक परिवार के साथ सदैव खड़ा रहने के लिए तत्पर हैं.

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रणबांकुरों की याद में सासाराम समाहरणालय परिसर में कारगिल स्मृति स्थल का निर्माण भी कराया गया है. तत्कालीन डीएम डॉ. वसीमुद्दीन अहमद अंजुम की पहल पर नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से समाहरणालय में कारगिल स्मृति स्थल की नींव पांच हजार रुपये से रखी थी. यह राशि नेहरू युवा केंद्र को केंद्र सरकार से प्रोत्साहन के तौर पर मिली थी, जिसे शहीद के परिजन को सम्मानित किया जाना था. लेकिन कारगिल युद्ध में जिले का कोई सपूत शहीद नहीं होने के कारण जिला प्रशासन ने उक्त राशि से कारगिल योद्धाओं की याद में स्मृति स्थल का निर्माण कराया.

सासाराम समाहरणालय परिसर में स्थित कारगिल विजय स्मृति स्थल

स्मृति चिह्न स्थल की धारशीला आजाद युवा क्लब व एनवाईके के माध्यम से एक जनवरी 2002 को तत्कालीन डीएम ने रखी थी. निर्माण कार्य को मुकाम तक पहुंचाने में सहयोग का कारवां भी बढ़ता गया. इस दौरान कई रूकावटें भी आई, लेकिन शहीदों के सम्मान के आगे बाधाएं दूर भी होती गई.

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