रोहतास: सोन नहर में रेस्क्यू कर पकड़े गए पांच क्विंटल के घड़ियाल की पूंछ में लगी है डिवाइस, वन विभाग की टीम कर रही जांच, संरक्षित क्षेत्र में छोड़ने की हो रही तैयारी

रोहतास में वन विभाग की टीम के पिछले दस दिनों से सिरदर्द बना घड़ियाल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बुधवार शाम पकड़ में आ गया. इसके बाद वन विभाग के साथ-साथ आम लोगों ने भी राहत की सांस ली है. डेहरी इलाके के सोन नहर में करीब दस दिनों पहले लोगों ने घड़ियाल को देखा था. इसके बाद से ही वन विभाग की टीम उसे तलाश रही थी. आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद बुधवार शाम उसे नासरीगंज के सैय्यद बिगहा के पास नहर में पकड़ने में सफलता हासिल हुई.

इस संबंध में गुरुवार शाम आयोजित प्रेसवार्ता में डीएफओ मनीष कुमार वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि टीम के अथक प्रयास से बुधवार शाम नासरीगंज के सोन नाहर से घड़ियाल का रेस्क्यू सफल हुआ और उसे पकड़ कर बाहर निकाला गया. घड़ियाल इतना भारी भरकम था कि जाल की गिरफ्त में आने के बाद भी एक से डेढ़ घंटे पानी से बाहर निकालने में समय लगा. डीएफओ ने कहा कि उसे सुरक्षित वन विभाग कार्यालय लाया गया है. जहां डब्लूटीआई की टीम देखरेख कर रही है. घड़ियाल का वजन लगभग पांच क्विंटल है.

जांच के क्रम में देखा गया कि घड़ियाल की पूंछ में एक डिवाइस लगा है, इसे वीएचएफ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) कहते है. यह जिस नेचुरल हेबीटेट में घड़ियालों को संरक्षित किया जाता है, वहां इस तरह वीएचएफ लगाए जाते हैं. इससे घड़ियालों की गिनती में आसानी होती है. साथ ही घड़ियाल की सारी गतिविधियों पर भी नजर रखा जाता है. वो क्या खाते है से लेकर कैसे प्रजनन एवं अन्य क्रियाओं की जानकारी इसके माध्यम से ली जाती है. बताया कि वीएचएफ लगे होने से स्पष्ट है कि सोन नहर में जो घड़ियाल आया था, वो किसी संरक्षित इलाके से बाढ़ के पानी से आ गया था.

बताया कि अब डिवाइस से पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घड़ियाल कहां से आया था. डीएफओ ने कहा कि बेतिया में गंडक नदी में घड़ियालों को नेचुरल हेबीटेट बनाया गया है. जहां इन्हें संरक्षित किया जाता है. बताया कि सोन नहर से पकड़े गए इस घड़ियाल को बेतिया भेजा जा सकता है. वहां इसे गंडक नदी में सुरक्षित छोड़ा जाएगा. बताते चलें कि उक्त मगरमच्छ पहली बार 23 अगस्त को अकोढ़ीगोला नहर में देखा गया था. उसके बाद डेहरी में वन विभाग की टीम द्वारा पकड़ने का प्रयास असफल रहा था.

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